train sex – फूफा जी ने मुझे ट्रेन में चोदकर औरत बनाया

यंग गर्ल नीड सेक्स कहानी में मुझे अपने फूफा जी बहुत हैण्डसम लगते थे, मैं उनके साथ अपना पहला train sex करना चाहती थी. एक दिन मैंने उन्हें प्रोपोस ही कर दिया. दोस्तो, मैं कुसुम हूँ. मेरी उम्र इस समय 20  साल है. यह जो यंग गर्ल नीड सेक्स कहानी मैं आपको बताने जा रही हूँ, वह मेरी जिंदगी की हकीकत है. मेरी बुआ की शादी अब से दो साल पहले दीपक से हुई. दीपक  की उम्र इस समय 29  साल है और वह एक बिजनेसमैन हैं.

अपने काम के सिलसिले में उनका हमेशा ही बाहर आना-जाना लगा रहता है और वह अक्सर हमारे यहां, यानि अपनी ससुराल में आते-जाते रहते हैं. दीपक  बहुत ही हंसमुख व्यक्ति हैं. शादी के बाद से ही जब भी मैं रोज फूफाजी को देखती, मेरे दिल में हलचल होने लगती थी. वे मुझे बहुत अच्छे लगते थे और शायद मैं उनके जैसा ही पति चाहती थी. बुआ भी हमेशा उनकी तारीफ करती रहती थीं. एक बार मैंने बुआ को बात करते हुए सुना कि दीपक का रोमांटिक अंदाज़ और स्टैमिना बहुत लंबा है, वे बहुत देर तक टिकते हैं. दीपक हमेशा फुल मूड में रहते हैं और कभी भी, कहीं भी चालू हो जाते हैं.

हालांकि जब भी मुझे मौका मिलता, मैं दीपक फूफाजी से फोन पर घंटों बात करती थी.हमारी बातें हमेशा शरारत भरी होती थीं और वे मुझे बहुत अच्छे लगने लगे थे.आखिर एक दिन मैंने हिम्मत करके उन्हें प्रपोज़ कर दिया. मैंने बात करते हुए कहा- दीपक फूफाजी, एक बात कहनी थी. आप मुझे बहुत अच्छे लगते हैं, मैं आपको चाहने लगी हूँ. इस पर उन्होंने हंस कर कहा- समय आने पर मैं जवाब दूँगा. उसके बाद भी हम फोन पर हमेशा बात करते रहे. मेरा सवाल अब तक निरुत्तर रहा था.

अब हमारी बातें कभी गंभीर, तो कभी रोमांस से भरी होती थीं. वे हमेशा मेरे कपड़ों के बारे में पूछते और कहते- मैं तुम्हें लहंगा-चोली में देखना चाहता हूँ.एक बार बुआ और दीपक फूफाजी हमारे घर आए. दीपक फूफाजी ने मुझे पहले ही अपने आने की खबर दे दी थी इसलिए मैं पार्लर जाकर तैयार हो चुकी थी. लेकिन अगले दिन दीपक फूफाजी को जयपुर किसी काम से जाना था तो वे दोनों आए और फूफा जी जाने की बात करने लगे. जब वे लोग यह बात करने लगे तो मैंने जिद की कि मुझे भी आपके साथ जयपुर चलना है क्योंकि मैं कभी जयपुर नहीं गई.

मेरे मन में कुछ और ही प्लानिंग थी, यंग गर्ल नीड सेक्स को वे समझ चुके थे. आखिर मेरे घर वालों ने भी मुझे इजाज़त दे दी और दीपक फूफाजी ने मेरा रिजर्वेशन भी अपने साथ करा लिया. मैंने जाने से पहले अपनी चूत को अच्छे से साफ कर लिया और चिकनी कर ली. वैसे भी मैं पहले ही पार्लर जाकर तैयार थी. अगले दिन मेरा रिजल्ट आने के बाद कॉलेज में एक प्रोग्राम था.

उसी दिन हमारी ट्रेन रात 9 बजे दिल्ली से जयपुर की थी. मैं शाम 5 बजे प्रोग्राम में शामिल होने चली गई. रात 8 बजे मेरे बड़े भाई ने मुझे प्रोग्राम से पिक किया और स्टेशन छोड़ा, जहां दीपक फूफाजी पहले ही पहुंच चुके थे. मैंने उस समय व्हाइट टॉप और लाइट ब्लू जींस पहन रखी थी जिसमें मैं बहुत हॉट लग रही थी. मेरा पूरा फिगर उन कपड़ों में साफ दिख रहा था. रात 9 बजे गाड़ी आई और मैं और दीपक फूफाजी ट्रेन में चढ़ गए.

antarvasna com – दोनों एक ही ट्रैन कूप में 

जल्दी  ही ट्रेन चल पड़ी. हमारा रिजर्वेशन फर्स्ट एसी में था डबल कूपे वाले में. मैं उन्हें अकेले देखकर बार-बार मुस्कुरा रही थी और शर्मा रही थी. हमारी बातें शुरू हुईं. मैंने समय देखते हुए फिर से उन्हें प्रपोज़ किया और कहा- दीपक जी, आपने जवाब नहीं दिया.इस पर उन्होंने कहा- मेरी ओर से हां है. मैं भी तुम्हें पसंद करता हूँ. लेकिन हमारे रिश्ते की मर्यादा भी है. तुम्हें नापसंद करने की कोई वजह नहीं है. यह कहते वे मेरी तारीफ करने लगे. मैंने कहा- दीपक जी, आप चिंता मत करो. मैं कभी आपको धर्मसंकट में नहीं डालूँगी. आप बस मेरा पहला प्यार हो. इतने में टीटी आया और हमारा टिकट चेक करके बोला- आप लोग नए कपल हैं, इसलिए कूपे को अन्दर से लॉक करके रेस्ट कीजिए. टीटी के जाते ही दीपक फूफा जी ने दरवाजा लॉक कर दिया.

टीटी की बात पर मुझे हंसी आ रही थी. मैंने कहा- देखा, अब तो लोग भी हमें पति-पत्नी समझने लगे हैं. वे मुस्कुरा दिए. मैं भी हंसती हुई बोली- वैसे भी मुझे आपके साथ पत्नी का रिश्ता ही रखना है. दीपक ने कहा- तो आज हमारी सुहागरात हम यहीं मनाएंगे. मैंने मज़ाक में कहा- मुझे आपके साथ कोई सुहागरात नहीं मनानी. जाने कितने जालिम हो आप … न जाने क्या-क्या करोगे मेरे साथ? मैं तो एक नाजुक कली हूँ. दीपक बोले- आज मैं तुम्हें कली से फूल बना दूँगा. मैंने कहा- दीपक, मुझे चेंज करना है. वह बोले- कर लो न चेंज … किसने रोका है?

मैं उनकी ओर बढ़ती हुई बोली- भागो, शरारती कहीं के. मुझे तुम्हारे सामने चेंज नहीं करना. वैसे भी तुम्हारे रहने से मुझे शर्म आ रही है. कहीं तुम कोई शरारत न कर दो. यह सब मैं शर्माती और मुस्कुराती हुई बोल रही थी. वे बोले- ठीक है, मैं बाहर से आता हूँ. वैसे भी मुझे तुम्हें कुछ अलग ही देखना है, जो अब तक मैंने नहीं देखा. यह कह कर फूफा जी बाहर चले गए.

मैंने जल्दी से अपने बैग से रेड प्लेन लहंगा-चोली निकाली और चेंज कर लिया. मैंने अन्दर कुछ भी नहीं पहना था यानि no bra no panty फिर मैंने आईने में खुद को देखा. ब्लाउज पीछे से बैकलेस था, एक डोर से बंधा था और आगे से बहुत गहरे गले का था, जिसमें मेरे क्लीवेज साफ दिख रहे थे. लहंगे को मैंने नाभि से नीचे से बाँधा ताकि मेरी नाभि साफ साफ दिखे.

मैंने हाथों में चूड़ियां और मेहंदी पहले से ही लगा रखी थी. पैरों में पायल और होंठों पर रेड लिपस्टिक लगाई. मेरे बाल खुले थे, जो कुछ दिन पहले ही स्ट्रेट कराए थे. मेरा पेट साफ दिख रहा था और पीठ पूरी बैकलेस थी. जब मैंने आईने में देखा, तो मैं हॉट और सेक्सी लग रही थी. मेरे अंग-अंग का एक-एक कटाव साफ दिख रहा था. मेरी 21 साल की उम्र और 32-28-34 का फिगर.

मेरे बूब्स एकदम टाइट थे और मेरी गांड हल्की बाहर को निकली थी.

इसलिए मेरी बॉडी लहंगा-चोली में बहुत हॉट लग रही थी.

मैंने लाइट ऑफ कर दी, रेड ओढ़नी ली और पीठ के बल लेट गई.

ओढ़नी को मैंने चादर की तरह ढक लिया और चेहरा भी ढक लिया था.

मैंने दीपक फूफा जी को कॉल किया- आ जाइए, मैंने चेंज कर लिया है.

मैंने दरवाजा पहले ही अनलॉक कर दिया था.

मेरे मन के अरमान अब पूरे होने वाले थे.

आज मैं अपने प्यार को पूरे दिल से सब कुछ अर्पण करने वाली थी.

यह सोचते ही मेरी चूत हल्की-हल्की गीली होने लगी थी और मेरे अन्दर एक अजीब-सी गुदगुदी होने लगी थी.

आज मैं पहली बार चुदने वाली थी, वह भी अपने पहले प्यार के साथ.

इतने में दरवाजा खुला और दीपक फूफाजी अन्दर आ गए.

उन्होंने दरवाजा लॉक किया.

वे उस समय कुर्ता-पायजामा पहने थे.

उन्होंने लाइट ऑन की और मुझे एकटक देखते रह गए.

मैंने शर्माते हुए कहा- दीपक, प्लीज लाइट ऑफ कर दो. मुझे शर्म आ रही है. तुम्हारे इस तरह देखने से ही मुझे शर्मिंदगी हो रही है.

जवाब में उन्होंने लाइट ऑफ कर दी.

लेकिन फिर भी इतनी रोशनी थी कि हम एक-दूसरे को साफ देख सकते थे.

साथ ही उन्होंने जीरो वाट का बल्ब चालू कर दिया.

मैंने कहा- दीपक देखो … मैंने ये कपड़े सिर्फ इसलिए पहने क्योंकि तुम्हारी यही इच्छा थी!

मैं लेटी थी और दीपक जी मेरे पास आकर मुझसे सटकर बैठ गए.

उन्होंने मेरी चुनरी को धीरे-धीरे मेरे शरीर से हटा दिया.

वे मुझे एकटक देखने लगे.

मैंने कहा- दीपक … जैसा तुमने कहा था कि मुझे लहंगा-चुनरी में देखना चाहते हो, आज मैं वैसे ही तुम्हारे सामने हूँ.

मैंने अपने दोनों हाथों से अपने बूब्स को ढक लिया, अपने शरीर को छुपाने की कोशिश करते हुए.

मैं दीपक को अपने क्लीवेज देखने से रोक रही थी और शर्माती हुई बोली भी कि दीपक, प्लीज ऐसे मत देखो न!

हम दोनों एक-दूसरे की आंखों में खोए हुए थे.

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मैंने फिर से कहा- दीपक, मुझे इस तरह मत देखो. मुझे शर्म आ रही है. अपनी नजरें हटा लो.

दीपक ने मेरे दोनों हाथ पकड़ लिए और उन्हें ऊपर उठा दिया.

उनकी पकड़ इतनी मजबूत थी कि मेरा कोई जोर उनके सामने नहीं चला.

मैंने अपने हाथ छुड़ाने की हल्की कोशिश की.

लेकिन अब मैं पूरी तरह उनके बस में थी.

वे अपने पूरे शरीर को मेरे ऊपर ले आए और मेरे ऊपर लेट गए.

पहली बार कोई मेरे इतने करीब था, लेकिन मुझे इसका अहसास भी नहीं हो रहा था.

दीपक फूफा जी ने मेरे निचले होंठों के पास अपने होंठ लाए और उन्हें चूमने, काटने और चूसने लगे.

उन्होंने मेरी लिप्सटिक तक चूस ली.

मैं तो मानो मदहोश-सी होने लगी.

वे मेरे निचले होंठ को बुरी तरह चूस रहे थे और मैं मछली की तरह तड़प रही थी.

मेरा शरीर जैसे जलने लगा था.

धीरे-धीरे वे मेरे गले पर आए और वहां चूमने लगे.

वे जंगली अंदाज में मेरे शरीर को अपने दांतों से चूस रहे थे.

मेरे अन्दर एक अजीब-सी गुदगुदी छाने लगी थी.

मेरी चूत तो पूरी तरह गीली हो चुकी थी.

मैंने अपने होंठ काटे, आंखें बंद कीं और मदहोश होकर दीपक फूफा जी को अपना काम पूरा करने में साथ दे रही थी.

लेकिन नीचे मेरी चूत का हाल और भी बुरा था जो पूरी तरह गीली हो चुकी थी … जीवन में पहली बार.

मेरी हालत खराब होती जा रही थी.

शायद पहली बार कोई मेरे जिस्म से इस तरह खेल रहा था.

वे धीरे-धीरे मेरे बूब्स की ओर बढ़े और ब्लाउज के ऊपर से ही उन्हें चूमने लगे.

मेरे क्लीवेज की लाइनिंग पर भी वह अपने होंठ चला रहे थे.

लेकिन उन्होंने मेरे हाथ नहीं छोड़े और मैं तड़पती रही.

मेरे मुँह से सिसकारियां निकलने लगीं ‘आह … आह … आह …’

फिर वे और नीचे मेरे पेट पर चूमने लगे.

उन्होंने मेरे हाथ छोड़ दिए.

पहले तो मैंने अपने हाथ रोक रखे और अंगड़ाई लेने लगी.

लेकिन कुछ देर बाद मेरे हाथ अपने आप दीपक जी के बालों में चले गए और उन्हें सहलाने लगे.

मैं उनके सिर पर दबाव भी बना रही थी.

दीपक फूफा जी मेरे पेट को चूमते हुए अपने होंठों से सहला रहे थे.

मैं आंखें बंद कर, मदहोश होकर मजे में खो रही थी.

अचानक दीपक फूफा जी ने मेरे लहंगे का नाड़ा खोल दिया और उसे नीचे करने लगे.

मैंने अन्दर कुछ नहीं पहना था, इसलिए मुझे शर्मिंदगी हो रही थी.

मैंने उनके हाथ रोकने की कोशिश की लेकिन आखिरकार वे जीत गए.

देखते ही देखते उन्होंने मेरे लहंगे को मेरे शरीर से अलग कर दिया.

अब मैं उनके सामने नीचे से निर्वस्त्र थी.

शर्म से पानी-पानी होकर मैंने अपनी चूत को दोनों हाथों से ढकने की नाकाम कोशिश की.

तभी दीपक फूफा जी उठे और अपने सारे कपड़े उतार दिए.

उनका खड़ा लंड अब मेरी आंखों के सामने था.

वे मेरे दोनों पैरों के बीच आकर बैठ गए.

उन्होंने मेरे पैरों को सहलाते हुए अचानक उन्हें अपनी ओर खींचा.

फिर मेरे दोनों हाथ पकड़कर मुझे उठाया और सीधे अपनी गोद में बिठा लिया.

मैंने उनके इस अंदाज के बारे में कभी सोचा भी नहीं था.

उधर दीपक फूफा जी का लंड मेरी चूत के आसपास टकरा रहा था.

मेरे अन्दर एक अजीब-सी हलचल पैदा हो रही थी क्योंकि मैं जानती थी कि अब कुछ ही क्षणों में उनका लंड मेरी चूत के अन्दर होगा.

दीपक ने मेरे चेहरे को अपने दोनों हाथों से पकड़ा और मेरे होंठों पर अपने होंठ रखकर स्मूच करने लगे.

अब मेरी शर्म भी छूट चुकी थी, इसलिए मैं भी उनका साथ देने लगी.

उस पल हमारी जीभें आपस में टकरा रही थीं और मैं उस मजे को पूरी तरह ले रही थी.

हमारा स्मूच चरम सीमा पर था.

उधर दीपक फूफा जी ने मेरे बालों को एक तरफ करते हुए मेरे ब्लाउज की पीछे की डोरी को खोल दिया.

अब मेरा ब्लाउज ढीला हो चुका था, जिसे उन्होंने कुछ ही क्षणों में मेरे शरीर से अलग कर दिया.

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अब मैं उनके सामने पूरी तरह निर्वस्त्र थी.

दीपक ने मुझे कसकर अपनी बांहों में जकड़ लिया और प्यार करने लगे.

मेरे बूब्स उनकी छाती से दब चुके थे.

मुझे दीपक फूफा जी को कुछ बोलने या समझाने की जरूरत ही नहीं पड़ रही थी.

वे अपनी मर्जी से मेरे शरीर के साथ खेल रहे थे.

कभी वे मेरी पीठ को सहला रहे थे, कभी मेरे बालों को खींचकर उन्हें सहला दे रहे थे, तो कभी मेरे गालों पर चुंबनों की बौछार कर रहे थे.

कभी वे मेरे बालों को खींचते हुए मेरे गले पर चुंबन ले रहे थे और थोड़ा नीचे होते हुए मेरे स्तनों पर भी चुंबन ले रहे थे.

मैं भी उनके साथ चिपक कर उनके बालों को सहलाती हुई उन्हें उत्तेजित करने में लगी थी.

अब तो दीपक फूफा जी ने मेरे स्तनों को एक-एक करके चूसना शुरू कर दिया था और मेरी उत्तेजना को बढ़ाने में जुट गए थे.

उन्होंने अपना एक हाथ मेरी पीठ पर रखा था और दूसरे हाथ से मेरे स्तनों को पकड़ कर कभी दबाते तो कभी एक दूध को चूस लेते.

फिर अचानक वह समय आ गया, जिसका शायद मुझे और उन्हें इंतज़ार था.

दीपक फूफा जी का लंड मेरी चुत के आसपास ही घूम रहा था.

उन्होंने अपना हाथ मेरी गांड के पास ले जाकर उसे हल्का सा उठाया और अपने लंड को मेरी चुत के मुहाने पर ले आए.

फिर फूफा जी ने मुझे अपनी ओर चिपका लिया.

उनका लंड मेरी चुत के अन्दर घुस चुका था.

एक ही बार में पूरा लंड चुत में समा गया था.

मुझे बहुत ज्यादा दर्द भी हुआ, इतना ज्यादा कि मेरी आंखों से आंसू निकल आए.

मैं छटपटाने लगी, जिसे समझते हुए दीपक फूफा जी मेरे होंठों को चूसने लगे.

कुछ देर बाद दीपक फूफा जी ने मेरी आंखों में आंखें डालीं और फिर से जोरदार धक्के के साथ अपना लंड मेरी चुत में अन्दर कर दिया.

उन्होंने मेरी गांड को अपनी तरफ खींचते हुए यह प्रहार किया था.

इस बार मुझे बहुत ही ज्यादा दर्द हुआ और मैं छटपटाने लगी.

मैं उन्हें अपने से दूर करने लगी और मेरे मुँह से जोर से आवाज़ निकली- आह आह आह … मम्मी, मर गई.

मेरी आंखों से आंसुओं की धार निकलने लगी.

दोस्तो, मैं अपनी कुंवारी चुत की सील तुड़वा कर एक बार तो पछताने लगी थी कि इतना दर्द की नहीं सोची थी.

आपको मेरी सील पैक चुत की चुदाई की कहानी के अगले भाग में और भी मजा आने वाला है.

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